मैं कौन हूँ, इसका जबाब जीवन के हर पर्तो में ढूंढता हूँ। और सवाल और खुद की लुका- छिपी
में जो कुछ भी पाता हूँ, वो पन्नो पर उकेर देता हूँ। कुछ कवितायेँ बन जाती है तो कुछ कहानियॉ तो कुछ यादें.......

पन्नो को शब्दों से रंगना पसन्द है....
खुद को हल्का कर लेता हूँ....

Tuesday, March 28, 2017

कविता(व्यंग) - व्यापम , मौत ,और मौन की बात |

    

व्यापम , मौत ,और मौन की बात


कल रात मोदी जी सपने में आये।
थोड़े  उदास, थोड़े परेशान
थोड़े अचंभित,थोड़े हैरान 
परंतु, ह्रदय में वही "मौन" ,वही शान्ति
चेहरे पर दमक..वही शौर्य कांति।
मैंने हाथ जोर किया नमस्कार
बोले- सेल्फ़ी खिंच.. बेटा
पुराना हुआ ये व्यवहार।
बोले,
करना चाहता हु तुझसे "मन की बात"
मुहर्त शुभ है आज की रात..
मै अकचकाया,
आँखों को मिचमिचाया
घबराकर बोला-
रेडियो वालो को बुला दू क्या?
कैमरे आसपास लगवा दू क्या?
वो बोले,इससे बचकर तो रोज विदेश भागता हूँ।
"मौन मुख" "बोलते मन" से परेशान..
रोज रात जागता हूँ।।
‪‎व्यापम‬ के व्यापक होने पर ‎मौन‬ हूँ कब से..
घुट घुट कर जी रहा..
"‪‎शिव‬"का दिया विष पी रहा..
बोलू भी तो किससे -किसके विरुद्ध..
निपट मुर्ख जनता तो समझ जाएगी..
इसलिए अपने घर में नही चाहता छेरु कोई युद्ध..

‎मैं‬ ध्यान मग्न हो सब सुन रहा था..
हर बार की तरह ‪‎योजना‬ में कुछ गरीब के लिए चुन रहा था..
मौत रोज हो रही..
जनता आपको खोज रही..
इंतजार है,मन की बात का..
अपने देश में सुरक्षित जी सके..
ऐसे खुसनसीब हर रात का।।
वो गंभीर, थोड़े अधीर बोले
digital‬ india..में वो रात देखो कब तक आएगी..
फ़िलहाल मेरी मन की बात..मौन ही रह जाएगी।।
अपने लोग समझ रहे,लोगो को समझा रहे..
थोड़ा तुम उलझो,थोड़ा वो उलझा रहे..
फिर पानी जिस दिन सिर पे आएगा..
ये मोदी उस दिन भी तिरंगा लहराएगा.
अचानक नींद टूटी तो देखा..
कोई सख्श जा रहा था..
एरोप्लेन का पंखा,हवा में लहरा रहा था...
सफ़ेद कुर्ता,छाती वही 56 इंच चौड़ा है..
मै समझ गया..जरूर फिर विदेशी दौरा है..
गूंज रहा था बस उस रात
व्यापम ‪,मौते‬ और मौन की बात।

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