कल रात मोदी जी सपने में आये।
थोड़े उदास, थोड़े परेशान
थोड़े अचंभित,थोड़े हैरान
परंतु, ह्रदय में वही "मौन" ,वही शान्ति
चेहरे पर दमक..वही शौर्य कांति।
मैंने हाथ जोर किया नमस्कार
बोले- सेल्फ़ी खिंच.. बेटा
पुराना हुआ ये व्यवहार।
थोड़े उदास, थोड़े परेशान
थोड़े अचंभित,थोड़े हैरान
परंतु, ह्रदय में वही "मौन" ,वही शान्ति
चेहरे पर दमक..वही शौर्य कांति।
मैंने हाथ जोर किया नमस्कार
बोले- सेल्फ़ी खिंच.. बेटा
पुराना हुआ ये व्यवहार।
बोले,
करना चाहता हु तुझसे "मन की बात"
मुहर्त शुभ है आज की रात..
करना चाहता हु तुझसे "मन की बात"
मुहर्त शुभ है आज की रात..
मै अकचकाया,
आँखों को मिचमिचाया
घबराकर बोला-
रेडियो वालो को बुला दू क्या?
कैमरे आसपास लगवा दू क्या?
वो बोले,इससे बचकर तो रोज विदेश भागता हूँ।
"मौन मुख" "बोलते मन" से परेशान..
रोज रात जागता हूँ।।
आँखों को मिचमिचाया
घबराकर बोला-
रेडियो वालो को बुला दू क्या?
कैमरे आसपास लगवा दू क्या?
वो बोले,इससे बचकर तो रोज विदेश भागता हूँ।
"मौन मुख" "बोलते मन" से परेशान..
रोज रात जागता हूँ।।
व्यापम के व्यापक होने पर मौन हूँ कब से..
घुट घुट कर जी रहा..
"शिव"का दिया विष पी रहा..
बोलू भी तो किससे -किसके विरुद्ध..
निपट मुर्ख जनता तो समझ जाएगी..
इसलिए अपने घर में नही चाहता छेरु कोई युद्ध..
मैं ध्यान मग्न हो सब सुन रहा था..
हर बार की तरह योजना में कुछ गरीब के लिए चुन रहा था..
मौत रोज हो रही..
जनता आपको खोज रही..
इंतजार है,मन की बात का..
अपने देश में सुरक्षित जी सके..
ऐसे खुसनसीब हर रात का।।
घुट घुट कर जी रहा..
"शिव"का दिया विष पी रहा..
बोलू भी तो किससे -किसके विरुद्ध..
निपट मुर्ख जनता तो समझ जाएगी..
इसलिए अपने घर में नही चाहता छेरु कोई युद्ध..
मैं ध्यान मग्न हो सब सुन रहा था..
हर बार की तरह योजना में कुछ गरीब के लिए चुन रहा था..
मौत रोज हो रही..
जनता आपको खोज रही..
इंतजार है,मन की बात का..
अपने देश में सुरक्षित जी सके..
ऐसे खुसनसीब हर रात का।।
वो गंभीर, थोड़े अधीर बोले
digital india..में वो रात देखो कब तक आएगी..
फ़िलहाल मेरी मन की बात..मौन ही रह जाएगी।।
अपने लोग समझ रहे,लोगो को समझा रहे..
थोड़ा तुम उलझो,थोड़ा वो उलझा रहे..
फिर पानी जिस दिन सिर पे आएगा..
ये मोदी उस दिन भी तिरंगा लहराएगा.
digital india..में वो रात देखो कब तक आएगी..
फ़िलहाल मेरी मन की बात..मौन ही रह जाएगी।।
अपने लोग समझ रहे,लोगो को समझा रहे..
थोड़ा तुम उलझो,थोड़ा वो उलझा रहे..
फिर पानी जिस दिन सिर पे आएगा..
ये मोदी उस दिन भी तिरंगा लहराएगा.
अचानक नींद टूटी तो देखा..
कोई सख्श जा रहा था..
एरोप्लेन का पंखा,हवा में लहरा रहा था...
सफ़ेद कुर्ता,छाती वही 56 इंच चौड़ा है..
मै समझ गया..जरूर फिर विदेशी दौरा है..
गूंज रहा था बस उस रात
व्यापम ,मौते और मौन की बात।
कोई सख्श जा रहा था..
एरोप्लेन का पंखा,हवा में लहरा रहा था...
सफ़ेद कुर्ता,छाती वही 56 इंच चौड़ा है..
मै समझ गया..जरूर फिर विदेशी दौरा है..
गूंज रहा था बस उस रात
व्यापम ,मौते और मौन की बात।

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