दूध की छन्न सी आवाज
काली चायपती का रंग छोड़ना
जैसे घुल कर चीनी में
तुम्हारे प्यार का घुलना
चीनी मिटी से बने कप की टकराहट
जैसे याद दिलाती हो
तुम चाय बना रहे हो
जैसे मेरे आने पर ,
मुझे रुकने का कुछ और बहाना
दे देते हो ।
तुम मुझसे मेरा बेशकीमती वक़्त कैसे ले लेते हो?
बड़ी चालाक हो तुम.....
हा, चालाक ।
हा, चालाक ।
सुना तुमने ,मैंने चालाक कहा
तुम कब तक चाय बनाओगे
लाते क्यूँ नही,
मैं हर दिन इंतजार करती हूँ
काठ की तुम्हारी कुर्सी बेवजह झूलती है
किताबे धूल से ढक गयी है
तुम्हारा मोटा चश्मा तुम्हारी आँखे तलाश रहा
लाते क्यूँ नही,
मैं हर दिन इंतजार करती हूँ
काठ की तुम्हारी कुर्सी बेवजह झूलती है
किताबे धूल से ढक गयी है
तुम्हारा मोटा चश्मा तुम्हारी आँखे तलाश रहा
मैं हर दिन बेवजह आती हूँ
इस इंतजार में
तुम कभी तो दो कप लिए निकलोगे
और मुझे रुकने का बहाना मिलेगा..
इस इंतजार में
तुम कभी तो दो कप लिए निकलोगे
और मुझे रुकने का बहाना मिलेगा..
गौरव...

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