खूंटे पर टंगा हैं पिता का नीला कोट
कहते थे इसी कोट में ब्याह लाये थे माँ को
बड़ी बहन के ब्याह में भी यही कोट पहना था
और मेरे ब्याह के समय भी
बहुत जिद के बाद भी
कभी नया कोट नहीं पहना उन्होंने
गहरा नीला रंग मलिन हो गया
पर कोट पर लोहा होता रहा
और कंधे पर चढ़ जाता था
बड़े शान से ये नीला कोट
कमर झुकने के बाद भी
सिर सीधा रहता था , और
आँखों में चमक बना रहा
जैसे असंख्य सपने चमक रहे हो
मैं उनके आँखों में दवा डालने के बहाने
निहार लिया करता हूँ उन सपनो को
जिसे पूरा करने की कोशिश चुपके चुपके करता रहा
धीमी चाल उनकी आदत थी
वो कहते थे,
इससे लड़खड़ा कर गिरने से बचा जा सकता हैं।
एक रोज उनके मृत्यु के बाद
मैंने वही नीला कोट पहना
और महसूस कर रहा था
कंधे पर एक अदृश्य छुअन
जैसे पिता मेरे हर सफलताओ पर
मेर कंधे को मजबूती से थपथपा दिया करते थे।
सब ने कहा ,
मैं बाबू जी जैसा दिखने लगा हूँ इस नीले कोट में
और मैं अपनी आँखों मे वही चमक महसूस रहा हूँ
कहते थे इसी कोट में ब्याह लाये थे माँ को
बड़ी बहन के ब्याह में भी यही कोट पहना था
और मेरे ब्याह के समय भी
बहुत जिद के बाद भी
कभी नया कोट नहीं पहना उन्होंने
गहरा नीला रंग मलिन हो गया
पर कोट पर लोहा होता रहा
और कंधे पर चढ़ जाता था
बड़े शान से ये नीला कोट
कमर झुकने के बाद भी
सिर सीधा रहता था , और
आँखों में चमक बना रहा
जैसे असंख्य सपने चमक रहे हो
मैं उनके आँखों में दवा डालने के बहाने
निहार लिया करता हूँ उन सपनो को
जिसे पूरा करने की कोशिश चुपके चुपके करता रहा
धीमी चाल उनकी आदत थी
वो कहते थे,
इससे लड़खड़ा कर गिरने से बचा जा सकता हैं।
एक रोज उनके मृत्यु के बाद
मैंने वही नीला कोट पहना
और महसूस कर रहा था
कंधे पर एक अदृश्य छुअन
जैसे पिता मेरे हर सफलताओ पर
मेर कंधे को मजबूती से थपथपा दिया करते थे।
सब ने कहा ,
मैं बाबू जी जैसा दिखने लगा हूँ इस नीले कोट में
और मैं अपनी आँखों मे वही चमक महसूस रहा हूँ
Bohat behtareen👌👌👌👌
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