मैं कौन हूँ, इसका जबाब जीवन के हर पर्तो में ढूंढता हूँ। और सवाल और खुद की लुका- छिपी
में जो कुछ भी पाता हूँ, वो पन्नो पर उकेर देता हूँ। कुछ कवितायेँ बन जाती है तो कुछ कहानियॉ तो कुछ यादें.......

पन्नो को शब्दों से रंगना पसन्द है....
खुद को हल्का कर लेता हूँ....

Monday, April 24, 2017

कविता - कैसे लिखूं मैं प्रेम गीत? (Gaurow gupta)

कैसे लिखूं मैं प्रेम गीत?
.................................
इस गर्मी की तपती धरती पर
बैठे नँगे बदन
जब अन्नदाता ही मांगे रोटी 
तो बोलो ,प्रिये
कैसे लिखू मैं बसन्त के प्रेम गीत।
लिखता रहा जो प्रेम पत्र
इस सर्द, अलाव के काम आये,
सड़कों पर सोये अध् नँगे लोगो के।
जिन शब्दो ने कल तक मुझे जिन्दा रखा था
जलकर उसकी तपिश ने
जिंदा रखा उन्हें,
जिनकी गूंगी आवाज
लँगड़ी सड़कों से होकर,
बहरी संसद तक कभी नही पहुँची।
इस बारिश में बहती झोपड़ियाँ
जिसमें बह गये गाढ़े सपने
सड़क पर तंबू ताने जब वो
बना रहे है उम्मीद के चूल्हे पर
सरकारी सान्त्वना की भात
तो बोलो, प्रिये
कैसे लिखूं मैं बसंत के प्रेम गीत।
जंगलों में ,बड़े मशीनों के धुँआ को
काले हाथो से छाठते
ढूंढ रहे है अपने घरों को
और पाते है
एक रिक्त स्थान,
जहाँ हुआ करती थी
उनकी अपनी भाषा, संस्कृति और समाज
अधमरे से लेट गये है, जो इस धरती पर
गुजरता हूँ बीनने कुछ प्रेम फूल इन जंगलों में
तलवे पर चिपकते उनके लाल रक्त
जकड़ ले रहे है, मेरे आत्मा को
घिर जा रहा अवसाद से
तो बोलो प्रिय
इस उदास मौसम में
कैसे लिखू मैं बसन्त के प्रेम गीत।

✍ गौरव

Thursday, April 13, 2017

Ayman jamal (हिंदी, उर्दू को संजीदगी से सजाने वाली कवियत्री) पढ़िए कुछ रचनाये

Ayman jamal हिंदी, उर्दू को संजीदगी से सजाने वाली कवियत्री है। इनकी रचनाये आपको your quote mobile पर आसानी से मिल जायेगा। ayman ,अपने लिखने की रूचि को आधुनिक संसाधनों के माध्यम से मूर्त रूप देती है।किसी भी रचनाकार का परिचय उसके रचना से बेहतर कुछ और नही होता। अपने बेहतरीन शब्दो से पन्नो को रंगने वाली ayman की रचना पढ़िये।


"अब तो दिल के कई टुकड़ो ने दिल लगाया है,
किस किस हिस्से को क्या क्या समझाये"

- ayman jamal




















"इस कदर जान लिया तुमको
के अब अजनबी हो गये हम"

- ayman jamal




हर विषय को शब्दों में ढालने की कोशिश करती ayman की कुछ अन्य   रचनाये पढ़िए।












दिल्ली में आयोजित open mic session में अपनी रचना " आईना" को अपना आवाज देकर श्रोताओं का मन मोह लिया। सुनिये youtube link के जरिये ayman की रचना " आईना"


, 















एक कवियत्री के साथ साथ, ayman एक नई कोशिश G.E.N.D.E.R network से जुडी है। यह स्त्री और प्रकृति दोनों के बीच रिश्तों को बखूबी से बयाँ करता है। आइये इस वीडियो के माध्यम से जानते है, क्या है G.E.N.D.E.R network  उन्ही के शब्दों में..


लप्रेक - केंद्र और परिधि

लप्रेक
-----------
केंद्र, तुम इतना उदास क्यूँ रहने लगे हो?
मैं, मैं उदास कहाँ रहता हूँ, परिधि। तुम कुछ भी कहती हो।
ओह्ह तो, केंद्र ..तुमहे लगता है, इस मुस्कराहट के साथ सच छुपा लोगे।
कोशिश तो कर ही सकता हूँ , ना।
ओह्ह केंद्र, तुम मुझसे कह दो जो कहना चाहते हो, हल्का महसुस करोगे।
कहा था एक दफा, परिधि.. तब से और भारी हो गया है बोझ।
ओह्ह प्लीज़, केंद्र। फिर वही पूरानी बात। तुम्हे पता है , मेरे जीवन में प्रेम की जगह नही।
परिधि , यह झूठ इतनी आसानी से कैसे कह देती हो।
जितनी आसानी से तुम सच छुपा लेते हो केंद्र।
क्या हम शब्दो में उलझे रहेंगे , परिधि।
तुम्हे शब्दो से ही तो प्रेम है, केंद्र। नही तो मेरा तुमसे रोज मिलना, इस समुन्द्र किनारे रोज बैठना, तुम्हारे दुःख को उतना ही महसुस करना , जितना तुम्हारे सुख जीती हूँ, तुम्हे समझ नही आता।
समझ गया।
क्या?
मैं केंद्र हूँ, और तुम परिधि। दोनों एक दूसरे के बिना सम्भव नही हो सकते।
चलो चले, शाम हो गयी है। वरना ये समुन्दर की लहरें हमे किनारे से खुद में सिमटा कर ले जाएँगी।
इसी बहाने हम मिल तो जायेंगे, परिधि।
नही केंद्र, हमारा होना जरूरी है, मिट जाने के बाद इन समुन्द्र के किनारों पर मिलना कहाँ होगा। फिर ना तुम केंद्र होंगे और ना मै
परिधि।

Thursday, April 6, 2017

मैं गौ रक्षक हूँ ......


मुझे नही आता तरस, मेरी सम्वेदनाएँ नही फूटी जब खिंच कर गाड़ी से सड़कों पर लिटाया गया उसे। मैं पॉपकॉर्न खा रहा था और फेसबुक पोस्ट करने की सोच रहा था जब गौरक्षक के लात घूंसे उसके जबड़े तोड़ते रहे, हड्डियां मसलते रहे । यह सांस्कृतिक भीड़ अंतड़ियों को फाड़ कर गौभक्ति भर देना चाहती है। वो दिन रात टहलते है सड़कों पर, गाड़ियों से गाय की रक्षा में, हिन्दुओ की गाय की रक्षा में। जब कोई मुसलमान, दलित दीखता है गाय के आसपास वो बिना सवाल के उन्हें गाय हत्यारा घोषित करते है, इससे पहले की गाय की हत्या साबित हो, वो इंसान की हत्या कर देते है, और खुश करते है अपने मन को,
एक विराट शांति, ये चमकता ओज उनके चेहरे पर दौड़ता है। आज उनकी गौभक्ति का एक तमगा लग गया सीने पर, हाँ आज उन्होंने सच्ची गो भक्ति कर ली। स्वर्ग में एक सीट बुक हुआ।
मैंने देखा भुजाओं में बल युवाओं के, ये रौद्र रूप कुछ कर गुजरने का, देश की संस्कृति बचाने का , सारे बौद्धिक विचारों पर तमाचा जड़ने का, हां मैंने देखा उनके कोमल जज्बातों को जब कोई छूता है, चाहे वो गाय के नाम पर, या भगवान के नाम पर तो वो लहु बहाने के लिये तैयार रहते है, अपना नही किसी और का। इसे सहिष्णुता से जबड़न न जोड़े। अहिंसक देश हिंसा कर सकता है, जब बात गाय की हो। आपलोग अपनी माँ को माँ मानिये , वो लोग गाय को माँ मानेंगे।
घर में अपनी माँ पर हो रहे अत्याचार पर कभी आवाज नही उठाये भले, पर वो गाय को जब मुसलमानों, दलितों के हाथ में देखकर ऐसे अपवित्तर काम से चुप नही रहेंगे। वो जान ले लेंगे। यह आजादी हमे शास्त्र देता है, संविधान का पता नही।
इस कौम को ऐसे ही युवाओं की तो जरूरत है, ये चौड़ी छाती, ये विराट ललाट, हाथ में डंडा , सिर पर साफा, नाम के आगे या पीछे गौरक्षक।
सड़क पर बिछी अपनी लाश , आँखे ताक रही हो खुद को, शरीर का अंग बिखड़ा पड़ा हो, उंगलियां गिन रहा हो , कितने टुकड़े किये गये। तब शरीर से अलग हुआ यह मन यही कह रहा होगा, हाय रे अभागा मैं।

नीला कोट

खूंटे पर टंगा  हैं पिता का नीला कोट कहते थे इसी कोट में ब्याह लाये थे माँ को बड़ी बहन के ब्याह में भी यही कोट पहना था और मेरे ब्याह के सम...

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