मैं कौन हूँ, इसका जबाब जीवन के हर पर्तो में ढूंढता हूँ। और सवाल और खुद की लुका- छिपी
में जो कुछ भी पाता हूँ, वो पन्नो पर उकेर देता हूँ। कुछ कवितायेँ बन जाती है तो कुछ कहानियॉ तो कुछ यादें.......

पन्नो को शब्दों से रंगना पसन्द है....
खुद को हल्का कर लेता हूँ....

Friday, November 4, 2016

लोकतंत्र, सवाल और पत्रकार रवीश

Ndtv इंडिया पर बैन लगा है।फेसबुक खचाखच स्टैंड विथ ndtv के साथ ट्रेंड करने लगा है। यह वो लोग है जो सवाल को अहमियत देते है, और जिससे सरकार डरती है। क्योकि यह जिन्दा लोग है।

रवीश ने जबाब में प्राइम टाइम में अनोखा प्रयोग किया है, और हर बार करते है। सवाल करने के नए ढंग पर बखूबी से अपनी बात लोगो तक पहुचायी। "सवाल का सवाल है" नाम से 4 नवम्बर की primetime में सवाल किया कि सवाल कैसे करे, और सवाल करे तो जबाब अथॉरिटी देगा या ट्रोल। आर्ट ऑफ एक्सप्रेशन के माध्यम से मौजूदा हालात पर चुटकी लेते हुये रवीश ने पत्रकारिता की नई परिभाषा गढ़ी।

http://khabar.ndtv.com/video/show/prime-time/prime-time-when-we-will-not-ask-the-questions-so-what-would-we-do-437481

(इस लिंक पर वीडियो उपलब्ध है)

रामनाथ गोयनका पुरस्कार " जॉर्नलिस्ट ऑफ़ द ईयर " से सम्मानित रविश डिबेट को हो हुल्लड़ न बनाकर एक महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास करते है ताकि दर्शको को कुछ सकारात्मक जानकारी मिल सके। रवीश सवाल को अहमियत देते है, और एक पत्रकार का उसूल भी यही कहता है।

दृग कालिमा में डूबकर
तैयार होकर सर्वथा
हाँ लेखनी हृतपत्र पर
लिखनी तुझे है वह कथा
जग जाये तेरी नोख से
सोये हुए वो भाव जो

          (मैथिलि शरण गुप्त)

लोकतंत्र में सवाल क्यों महत्वपूर्ण है ?

जो सवाल नही करते वो जीते जी मरे हुये होते है, और जो सवाल करते है, मरकर भी उनका सवाल जिंदा रहता है।

थोडी देर सोचिये, क्या पता अगले दो सेकंड में आप सोचना भी बंद कर दे। इसलिये जल्दी ही सोचिये की अगर " आपके दिमाग में सवाल आना बंद हो जाये" तो क्या होगा। मैंने सोच कर देखा है- जी बिलकुल मैं डर गया था। मेरे हाथ पैर काँपने लगे थे। क्या, क्यों,कब्, कैसे ये प्रश्नवाचक शब्द मुझसे दूर जा रहे थे। ऐसा लगा समय यही रुक जाएगा।

जी बिलकुल जिसदिन आपके दिमाग में सवाल नही आएंगे, आप एक मशीन हो जायेंगे या जीते जी निष्प्राण हो जायेंगे।  आपकी आत्मा जिंदा है, वह इस बात का सबूत है जब तक आप सवाल कर्  रहे है।

सवाल आपको जिन्दा रखी हुई है, सवाल आपमें गति बनायी हुयी है। हम विकास तभी कर् रहे जब हम सवाल कर रहे।

अगर न्यूटन ने सेब को गिरता हुआ देख यह न पूछा होता की - सेब "कैसे "गिरा तो आज गुरुत्वाकर्षण का नियम हम नही जान पाते।
खोज हमारे अंदर उपजे सवाल का ही फल है।

आज सवाल न हो तो हम जीते जी मर जाते है। हम आत्माहीन प्राणी हो जाते है। आप सवाल करे सरकार से, समाज से, परिवार से । अगर आप चुप है तो सवाल करे खुद से की आप सवाल क्यों नही कर रहे।

सोच जिन्दा है,तो सवाल जिन्दा है, और सवाल जिन्दा है तो आप जिन्दा है। वरना सन्नाटा तो मरघटों पर पसरा ही है।

मौजूदा परिस्तिथी आपके सवाल को खत्म कर रही, मतलब आपको खत्म कर रही। आप चलते फिरते लाश है फिर, या यु कहे मशीन है।

भीड़ सवाल नही करती, दंगा करती है। हमेशा सवाल आखिर में खड़ा, भीड़ से अलग  एक शख्श करता है। तय करे आप की गूंगी भीड़ में शामिल होना चाहते है आप या एक अकेला सवाली बनना चाहते है। जो सवाल करता है, सरकार उस पर बवाल करती है।

वो जनता जिन्हें सरकार से सवाल करना पसंद नही है,( अंध भक्त) वो रवीश की प्राइम टाइम कैसे देखे, ताकि वो कुछ अपने लिए सकारात्मक जानकारी निकाल सके।

1- भूल जाये की स्टूडियो में बैठा शख्स रवीश कुमार है। यह भी भूल जाये की वह ndtv इण्डिया देख रहे है। ( कोशिश कीजिये थोड़ा मुश्किल है कुछ पूर्वाग्रहों से निकलना)

2- भूल जाइये की जो आलोचना हो रही है, वह बीजेपी सरकार की है। यूँ सोचिये यह किसी और देश की किसी और सरकार की बात कर रहे। ( यहाँ फूलों में बहार है)

3- जब भी कही मोदी सरकार की अच्छाई बताये। आप यूट्यूब या आर्काइव में जाकर बार बार देखिये।

मैं इसलिय यह सुझाव दे रहा क्योकि मौजूदा समय में जहाँ सोच और सवाल दोनों को खत्म किया जा रहा, आपको एक नागरिक होने के नाते अपने कुंद मानसिकता को खोलने की जरूरत है। आज अगर आपका पडोसी सवाल करने पर बुरा हश्र झेल रहा तो कल आप होंगे। सरकारे बदलेंगी पर कारनामे वही रहेंगी, फिर जब आप उनके चपेट में आएंगे, तब मत करना याद उस पत्रकार को" जिसने सवाल करना सिखाया।

बाकि जो है सो हइये है।

नीला कोट

खूंटे पर टंगा  हैं पिता का नीला कोट कहते थे इसी कोट में ब्याह लाये थे माँ को बड़ी बहन के ब्याह में भी यही कोट पहना था और मेरे ब्याह के सम...

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