मैं भूल जाता हु
चस्मा ,घडी ,पाजामा , मोज़े
बनियान , घडी , दवाइया
मैं भूल जाता हु
ठण्ड में ताप ना है अलाव
ओढ़नी है राजाइया
बहु कहने लगी है
मैं मेज पर पड़े फोटो को बार बार
सिढाने रख छोड़ देता हु

कल ग्लास का पानी भी
गिर गया था तकिए पर
ऐसा बेटे ने आज कहा
पुराने सन्दूक को यु ही
बार बार खुला छोड़ देता हु
जिसमे रखी हुई है कुछ पुरानी यादें
पोता पूछता है , क्यों इस कबाड़ को
मैं हर रोज खोलता हु
मैं भूल जाता हु
दिन, तारीख , मौसम
टेबल लैंप रात भर जला रहता है
डायरी खुली छूट जाती है
बहु कहती है
मेरी चहलकदमी से उसकी नींद टूट जाती है
मोज़े बदबू दे रही
चाय में चीनी ज्यादा पिने लगा हु
सब्जी में नमक की परवाह नहीं
अब न कुछ गलत लगता है
न ही कुछ सही
कभी कभी घर तक आने वाले रास्ते को
भूल जाता हु।
इसलिए अक्सर बेंच पर घंटो बैठा
रास्ते याद कर रहा होता हु
ऐसा छोटा बेटा रात के डिनर पर मुझसे पूछता है
शायद तुम्हे ज्यादा याद करने लगा हु
इसलिए भूल जाता हु
ऐसा मैं आईने में खुद को देख कर
सोच रहा।
चस्मा ,घडी ,पाजामा , मोज़े
बनियान , घडी , दवाइया
मैं भूल जाता हु
ठण्ड में ताप ना है अलाव
ओढ़नी है राजाइया
बहु कहने लगी है
मैं मेज पर पड़े फोटो को बार बार
सिढाने रख छोड़ देता हु

कल ग्लास का पानी भी
गिर गया था तकिए पर
ऐसा बेटे ने आज कहा
पुराने सन्दूक को यु ही
बार बार खुला छोड़ देता हु
जिसमे रखी हुई है कुछ पुरानी यादें
पोता पूछता है , क्यों इस कबाड़ को
मैं हर रोज खोलता हु
मैं भूल जाता हु
दिन, तारीख , मौसम
टेबल लैंप रात भर जला रहता है
डायरी खुली छूट जाती है
बहु कहती है
मेरी चहलकदमी से उसकी नींद टूट जाती है
मोज़े बदबू दे रही
चाय में चीनी ज्यादा पिने लगा हुसब्जी में नमक की परवाह नहीं
अब न कुछ गलत लगता है
न ही कुछ सही
कभी कभी घर तक आने वाले रास्ते को
भूल जाता हु।
इसलिए अक्सर बेंच पर घंटो बैठा
रास्ते याद कर रहा होता हु
ऐसा छोटा बेटा रात के डिनर पर मुझसे पूछता है
शायद तुम्हे ज्यादा याद करने लगा हु
इसलिए भूल जाता हु
ऐसा मैं आईने में खुद को देख कर
सोच रहा।

