रात एक तारा टुटा
आ गिरा जमी पर
आँखों को बंद कर
कुछ ख्वाईसे अपने नाम की
आ गिरा जमी पर
आँखों को बंद कर
कुछ ख्वाईसे अपने नाम की
वक़्त की शाख पर
सपने हासिल हुए
जो छूट गए उस रोज
उसको मुठ्ठी में इस शाम की
सपने हासिल हुए
जो छूट गए उस रोज
उसको मुठ्ठी में इस शाम की
इक किनारे पर बैठे
पत्थर समुन्दर में फेंके होंगे
चुन कर उन्होंने एक दिन
रख दिया हथेलियों पर
पत्थर समुन्दर में फेंके होंगे
चुन कर उन्होंने एक दिन
रख दिया हथेलियों पर
जो थी आपके काम की
यादें पुरानी खुलती है जब
ठहाके खूब लगी होंगी
दो लोग बैठे इस महफ़िल में
टकराए दो ग्लास फिर
खुशियों के जाम की
ठहाके खूब लगी होंगी
दो लोग बैठे इस महफ़िल में
टकराए दो ग्लास फिर
खुशियों के जाम की

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