रोज सुबह 10 बजे उठने वाला आज 6 बजे की अलार्म पर उठ गया था। क्योकि रोज इसी समय वह सामने वाली बालकनी में आकर चाय पिया करती थी।उसने अपना समय नही बदला, तो लगा भविष्य देखा जा सकता है। रोज रात पिता जी भविष्य की याद दिलाते तो 6 बजे चाय की कप पकडे वह दिलो दिमाग में खटकने लगती।
दिल्ली दिल वालो का होता है इसी चक्कर में किस्मत आजमा रहा था वो। इस बार घर से एक्स्ट्रा पैसे भी मंगवाया था , नया जैकेट और जीन्स लेना था। घर से जो पिता जी ने खरीद कर भेजा था वह सोते वक़्त पहन कर पिता के प्रेम का कर्ज चूका रहा था। आज भी 6 बजे उठा जैकेट पहना और अंग्रेजी का अखवार लिए सोचा दिल्ली और बिहार का रिश्ता जोर ही लेगा।
वह मुस्कराई थी। पर दिमाग में अचानक दोस्तों की बाते याद आई, की मुस्कुरा कर देखी थी या देख कर मुस्कुराई थी। कुछ भी हो, मुस्कराहट थी इस बात का संतोष था इसे।
जितने धीरे से गुड़ मॉर्निंग कहा था उतने ही जोर से दिल भी धड़क रहा था। जबाब का इंतजार करते करते घंटो बिता दिए। और वह चाय ख़त्म कर के कब का जा चुकी थी।
मेहनती था, लगन शील भी, थोड़ा उदास मन से अलार्म की घंटी पर उठ गया।आज कुहासा ज्यादा था। साफ साफ दिख नही रहा था। सामने देखा खड़ी है। गुस्सा और सदियो का प्यार जताते हुए इसने कहा, गुड़ मार्निंग का जबाब क्यों नही देती आप।मै देर तक इन्तजार करता रहा। डर भी रहा था इसलिए याद किया हुआ कुछ डायलॉग्स भूल गया था। पर बोल दिया। फिर भी बिना किसी जबाब के वही खड़ा रहा। कुछ गौर से देखा था तो चाय का प्याला हाथ में नही था, और वह थोड़ी अलग भी दिख रही थी। प्यार में इंसान अँधा हो जाता है, उसे तब पता चला जब वह अपने प्यार का हक़ ,उसके बजाए उसकी मम्मी पर जता गया था। अगले सुबह मुनिरका से वह निकल पड़ा था किशनगढ़ को नया कमरा देखने।
मैं कौन हूँ, इसका जबाब जीवन के हर पर्तो में ढूंढता हूँ। और सवाल और खुद की लुका- छिपी
में जो कुछ भी पाता हूँ, वो पन्नो पर उकेर देता हूँ। कुछ कवितायेँ बन जाती है तो कुछ कहानियॉ तो कुछ यादें.......
पन्नो को शब्दों से रंगना पसन्द है....
खुद को हल्का कर लेता हूँ....
Sunday, October 25, 2015
बालकनी का प्यार
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नीला कोट
खूंटे पर टंगा हैं पिता का नीला कोट कहते थे इसी कोट में ब्याह लाये थे माँ को बड़ी बहन के ब्याह में भी यही कोट पहना था और मेरे ब्याह के सम...
mai kaun hu?
Gaurow gupta
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