मैं कौन हूँ, इसका जबाब जीवन के हर पर्तो में ढूंढता हूँ। और सवाल और खुद की लुका- छिपी
में जो कुछ भी पाता हूँ, वो पन्नो पर उकेर देता हूँ। कुछ कवितायेँ बन जाती है तो कुछ कहानियॉ तो कुछ यादें.......

पन्नो को शब्दों से रंगना पसन्द है....
खुद को हल्का कर लेता हूँ....

Thursday, October 1, 2015

हिन्दू और मुसलमान

मैं , मैं नही हूँ।
तुम , तुम नही हो
मैं बस हिन्दू हूँ, और तुम बस मुस्लमान
क्योकि मैं भगवान को मानता हु
और तुम पैगम्बर को
मैं दीवाली मनाता हु और तुम ईद
मैं मन्दिर जाता हु तुम मस्जिद
मैं भजन करता हु तुम आजान पढ़ते हो
सब झूठ की बाते है जो कहते है
हम सब एक है
मुझे तो नही दिखता
जहाँ तुम ज्यादा हो
वहां मैं काँपता हूँ
जहाँ मैं ज्यादा हु
वहा तुम रात भर नही सोते
मन्दिरो पर फेके जाने वाले मांस
मस्जिदों पर फेके जाने वाले मांस
दोनों ही अलग होते है
इसलिए तो कभी तुम जलते हो
और कभी हम जलाये जाते है
पर एक समानता है
हम दोनों ही है हैवान
(पीछे से आवाज आती है)
नाह फिर भी अलग है
मैं हिन्दू हैवान
तुम मुसलमान हैवान

~गौरव

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