कविता -नया और पुराना
कुछ गीत पुराने है,
कुछ लफ्ज पुराने है,
कुछ यादे पुरानी है,
कुछ नग्मे पुराने है,
कुछ लफ्ज पुराने है,
कुछ यादे पुरानी है,
कुछ नग्मे पुराने है,
फिर भी नया सा लगता है,
हर सुबह की सूरज,
रात की मिठी चाँदनी,
हवा का गुनगुनाना,
पेड़ो का सरसराना,
हर सुबह की सूरज,
रात की मिठी चाँदनी,
हवा का गुनगुनाना,
पेड़ो का सरसराना,
तुमसे मुलकात पुरानी है,
पर मिलन नया है,
झाकता हु जब भी कल की यादो मे,
वक्त का समुन्द्र सिमट सा जाता है,
किस्से पुराने होते है,
पर दिलो से लिपट सा जाता है,
पर मिलन नया है,
झाकता हु जब भी कल की यादो मे,
वक्त का समुन्द्र सिमट सा जाता है,
किस्से पुराने होते है,
पर दिलो से लिपट सा जाता है,
उसी पुराने मोड़ पर अक्सर
आता हु,
क्योकी नये की चाहत मे,
वही पुराना अक्सर नया सा लगता है.
क्योकी नये की चाहत मे,
वही पुराना अक्सर नया सा लगता है.

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