मैं कौन हूँ, इसका जबाब जीवन के हर पर्तो में ढूंढता हूँ। और सवाल और खुद की लुका- छिपी
में जो कुछ भी पाता हूँ, वो पन्नो पर उकेर देता हूँ। कुछ कवितायेँ बन जाती है तो कुछ कहानियॉ तो कुछ यादें.......

पन्नो को शब्दों से रंगना पसन्द है....
खुद को हल्का कर लेता हूँ....

Thursday, September 10, 2015

25 जून के फसबुकिया वाल से


मैं पंथविरोधी हूँ।मैं धर्म विरोधी हूँ।मैं विचारधाराओ के मकरजाल का सख्त विरोधी हु जो आज हर एक युवाओ को गुलाम बना रहा।क्योकि मुझे स्वतंत्रता प्यारी है,स्वछंदता प्यारी है.मैं उस दौड़ का घोड़ा कतई नहीं बनना चाहता जिसमे मेरे आखो के दोनों बगल में पट्टी बन्धी हो ।मैं विचारो की स्वतंत्रता पर जोर देता हु ना की विचारधाराओ और वाद(ism) के गुलामी पर।आँख बन्द कर बोला गया लाल सलाम भी उतना ही खतरनाक है जितना भगवाधारी नारेबाज।मैं भीड़ का हिस्सा कतई नही बनना चाहता जहा स्वार्थ साधन अंतःकरण में बसा हो।

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