मैं कौन हूँ, इसका जबाब जीवन के हर पर्तो में ढूंढता हूँ। और सवाल और खुद की लुका- छिपी
में जो कुछ भी पाता हूँ, वो पन्नो पर उकेर देता हूँ। कुछ कवितायेँ बन जाती है तो कुछ कहानियॉ तो कुछ यादें.......

पन्नो को शब्दों से रंगना पसन्द है....
खुद को हल्का कर लेता हूँ....

Sunday, September 13, 2015

चलो पल भर दे दो साथ मेरा

  चलो पल भर दे दो साथ मेरा
चलो दो पल ही थामो हाथ मेरा
कल तक अजनबी थे
कल भी अजनबी हो जाओगे
कल तक तस्वीरों में थे
कल यादो में बस जाओगे

अनजान थे जिन रहो से
गुजर कर देखो कभी
पुराने वीरान जिंदगी में
उभरे प्रेम के उस मोड़ पर मुझे पाओगे

पूनम की चांदनी में आज तुम आये हो
मेरे सूखे होठो पर जो प्यास जगाये हो
सर्द सुबह में जो  ओस के बूंद  लाये हो
सदियों से दूर ,
आज  जो करीब आये हो

चलो पल भर दे दो साथ मेरा
चलो दो पल ही थामो हाथ मेरा

           -गौरव


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