नवम्बर की डायरी से एक और,
जिस फेसबुक के जरिये फ्रेंड रिक्वेस्ट से लेकर लव एक्सेप्ट तक का सफ़र तय किया था, जब रोमिंग में फ़ेसबुक के जरिये ही पास होने का एहसास बरकरार रहता था, तब उसी फेसबुक के एक पासवर्ड मांगने की वजह से रिश्ते सीसे की तरह टूटते नजर आये।
दिल पर पत्थर रख कर कहा था मैंने ,भूल सा गया हु,पर जब उसने कहा,
मुझे भी भूल जाओ और जाने को पलटी तो सिद्धान्तों, जज्बातों से समझौता करना पड़ गया|
फिर उसने अपने आप से समझौता कर ब्लाक का बटन दबा ही दिया था, वह जल्दी निर्णय लेती थी,यही बात पसंद भी आती थी। पर कभी पसंद आती चीज नापसंद भी आ सकती है।
सोचता हु काश प्यार चिट्ठी से शुरू किया होता|
दिल पर पत्थर रख कर कहा था मैंने ,भूल सा गया हु,पर जब उसने कहा,
मुझे भी भूल जाओ और जाने को पलटी तो सिद्धान्तों, जज्बातों से समझौता करना पड़ गया|
फिर उसने अपने आप से समझौता कर ब्लाक का बटन दबा ही दिया था, वह जल्दी निर्णय लेती थी,यही बात पसंद भी आती थी। पर कभी पसंद आती चीज नापसंद भी आ सकती है।
सोचता हु काश प्यार चिट्ठी से शुरू किया होता|

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