नारेबाजी की बढ़ती आवाज में उसने चिल्ला कर पूछ लिया ,नाम क्या है तुम्हारा?
क्या ?नाम नाम !
मैं नाम बताने जा ही रहा था तबतक पीछे से भीड़ की धक्कामुकि में उसने मेरी पांच उंगलियो के बिच में अपनी उंगलियो को फसा कर नारेबाजी शुरू कर दी।
छात्रो की भीड़ ITO से शास्त्री भवन की ओर बढ़ रही थी। सफ़र लंबा था, भीड़ जितनी धक्का देती उसकी पकड़ मेरी उंगलियो के बिच उतनी ही तेज हो जाती। एक हाथ को हवा में उठा कर चीखती हुई ललकार रही थी, सरकार के बिरुद्ध रौद्र रूप था उसका।पर ऊपर से सख्त उतनी ही अंदर से कोमल सी लगी।
कौन सी पार्टी से हो?
किसी से भी नही!
कौन से यूनिवर्सिटी से हो?
दिल्ली, दिल्ली यूनिवर्सिटी
ह्म्म्म्म्म्म फिर नारेबाजी
मै भी हाथ को पकड़े उसके आवाज में आवाज मिला रहा था।
बिच रास्ते में बैरिकेड था।छात्रो की भीड़ उसे तोड़ने की कोशिश कर रही थी।चन्द पल के लिए मैं अपने आप को हीरो, उसे हीरोइन और पुलिस को उसका पिता समझने लगा।पुलिस की भीड़ छात्रो को पकड़ पकड़ बस में ठूसने लगी।अफरा तफरी मचने लगा। मेरे हाथ से उसका हाथ छुटने चूका था।तबतक भीड़ में गुम हो गयी वो,अपने नाम के साथ।
, पर कुछ छोड़ गयी थी मेरे पास अपनी आवाज।बार बार भीड़ में सुनने की कोशिश करता रहा पर नाकामयाब था। बार बार अफ़सोस सता रहा था की मैं हिम्मत कर क्यों न पूछ पाया, नाम क्या है तुम्हारा? शायद अधूरी शुरुवात को फेसबुक पर तो पूरी करता। हम सरकार से जित चुके थे, पर मैं फिर भी हारे मन से वापस लौट रहा था। बार बार गूंज रहे थे उसके पहले शब्द, नाम क्या है तुम्हारा?
मैं कौन हूँ, इसका जबाब जीवन के हर पर्तो में ढूंढता हूँ। और सवाल और खुद की लुका- छिपी
में जो कुछ भी पाता हूँ, वो पन्नो पर उकेर देता हूँ। कुछ कवितायेँ बन जाती है तो कुछ कहानियॉ तो कुछ यादें.......
पन्नो को शब्दों से रंगना पसन्द है....
खुद को हल्का कर लेता हूँ....
Thursday, November 5, 2015
नाम क्या है तुम्हारा?
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नीला कोट
खूंटे पर टंगा हैं पिता का नीला कोट कहते थे इसी कोट में ब्याह लाये थे माँ को बड़ी बहन के ब्याह में भी यही कोट पहना था और मेरे ब्याह के सम...
mai kaun hu?
Gaurow gupta
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