हर रात उतर चाँद जब,
आँगन रौशन कर जाता है,
हर भोर हया की लाली से,
ख़्वाब सिंदूरी भर जाता है।
आँगन रौशन कर जाता है,
हर भोर हया की लाली से,
ख़्वाब सिंदूरी भर जाता है।
आता है कोई चुपके- चुपके
जुगनुओं से छुप- छुप के
बैठ सिरहाने मेरे ,वो हौले से
होठों पर तपते होठ रख जाता है
जुगनुओं से छुप- छुप के
बैठ सिरहाने मेरे ,वो हौले से
होठों पर तपते होठ रख जाता है
कितनी शिकायतें की है मैंने
आओ तो रुक भी जाओ
जाने की जल्दी क्यूँ होती है
जब हो रातें छोटी तो
ये आँखे कितनी रोती है..
आओ तो रुक भी जाओ
जाने की जल्दी क्यूँ होती है
जब हो रातें छोटी तो
ये आँखे कितनी रोती है..
वो हँस कर मुझसे लिपट जाता है
मिरे भींगे बालों को
हौले से सुलझाता है
मैं नाख़ून से पीठ पर उसके
अपने प्रेम पत्र लिख जाती हूँ
ना बोले फिर भी जब कुछ वो
मैं थोड़ी सी चिढ जाती हूँ...
मिरे भींगे बालों को
हौले से सुलझाता है
मैं नाख़ून से पीठ पर उसके
अपने प्रेम पत्र लिख जाती हूँ
ना बोले फिर भी जब कुछ वो
मैं थोड़ी सी चिढ जाती हूँ...
पलट कर मुँह मैं, बिस्तर पर
इस ओर से उस ओर होती हूँ
होता ना स्पर्श जब उसका
पूरी रात रात मैं रोती हूँ...
इस ओर से उस ओर होती हूँ
होता ना स्पर्श जब उसका
पूरी रात रात मैं रोती हूँ...
कहते है लोग, मैं पगली लड़की हूँ
रेत किनारे जो घर बनाया था
हर कोना खारे पानी से भर गया
मेरा आशिक सदियो पहले
आंसुओं संग पिघल के मर गया
रेत किनारे जो घर बनाया था
हर कोना खारे पानी से भर गया
मेरा आशिक सदियो पहले
आंसुओं संग पिघल के मर गया
पर हाँ मैं तो पगली लड़की हूँ ना,
मेरे ख्वाब भी मुझसे नासमझ है
हो न हो तुम्हे, पर मुझको खबर है
हसरतों में जिंदा होकर मेरे वो
हर रात दबे पाँव आता है,
रात उतर चाँद जब
आँगन रोशन कर जाता है
डेहरी का दीया बुझा कर
आँखों में मिरे वो,
इक ख्वाब सिंदूरी भर जाता है।
मेरे ख्वाब भी मुझसे नासमझ है
हो न हो तुम्हे, पर मुझको खबर है
हसरतों में जिंदा होकर मेरे वो
हर रात दबे पाँव आता है,
रात उतर चाँद जब
आँगन रोशन कर जाता है
डेहरी का दीया बुझा कर
आँखों में मिरे वो,
इक ख्वाब सिंदूरी भर जाता है।

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