मेरी एक मात्र हमसफ़र है
मेरे जीवन की।
मैं चलते - चलते थाम लेता हूँ
उँगलियाँ उसकी
जैसे किसी अनजान सफर पर
थाम लेता था, माँ की ऊँगली
खो जाने के डर से...
थाम लेता था, माँ की ऊँगली
खो जाने के डर से...
पिता के मृत्यु के बाद
मेरी गलतियों को सुधारने
का जिम्मा उसने ले लिया
कभी गुस्सा होकर
तो कभी प्रेम से
मुझे एहसास दिलाती है कि
मुझे सफर जारी रखना है
मेरी गलतियों को सुधारने
का जिम्मा उसने ले लिया
कभी गुस्सा होकर
तो कभी प्रेम से
मुझे एहसास दिलाती है कि
मुझे सफर जारी रखना है
मेरे घर के हर कोने में
दर्ज है उसकी उपस्थिति
माँ की पुरानी आलमारी से
लेकर पिता के काठ की कुर्सी तक
उसके स्पर्श को पहचानते है
नल की टपटप
बर्तन की खन खन
पर्दे के हटते ही ,झांकती सुबह की धुप
सब उसका ही गुणगान करते है।
दर्ज है उसकी उपस्थिति
माँ की पुरानी आलमारी से
लेकर पिता के काठ की कुर्सी तक
उसके स्पर्श को पहचानते है
नल की टपटप
बर्तन की खन खन
पर्दे के हटते ही ,झांकती सुबह की धुप
सब उसका ही गुणगान करते है।
मेरे बगीचे के फूल भी खिलने से
मना कर देते है
जिस दिन वह उदास
कमरे में ख़ामोशी से आँसू बहाती है
उसकी खिलखिलाहट सुन
गिलहरी की दौड़ शुरू हो जाती है।
मना कर देते है
जिस दिन वह उदास
कमरे में ख़ामोशी से आँसू बहाती है
उसकी खिलखिलाहट सुन
गिलहरी की दौड़ शुरू हो जाती है।
वह मेरे जीवन के
हर रिक्त स्थान को
अपने मौजूदगी से भर देती है
बिना एहसास दिलाये की
वो ऐसा कर रही है...#gaurowgupta
वो ऐसा कर रही है...#gaurowgupta

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