प्रिय दिल्ली की सर्द
तुम बिलकुल श्रुति की तरह बीहैव करने लगी हो.. उसका मूड भी बिलकुल उल्टा रहता है, जेसे आजकल समय के साथ तुम्हारी ठण्ड। लाख प्यार होते हुए भी मिलने से डर लगता है ,जेसे तुमसे आजकल लग रहा है। .घर से अब तो हिदायत भी मिलने लगी है , तुमसे दूर रहने के लिए बिलकुल वेसे ही जब बगल वाली आंटी ने श्रुति और हमारे बढ़ते प्यार की खबर घर तक पंहुचा आई थी . बड़ी डाट पड़ी थी , पर चोरी छुप्पे मुलाकात के तरकीब तो हर प्रेमी युगल निकाल ही लेता है. तुम श्रुति की हमेशा याद दिलाती हो, इसलिए श्रुति बार बार कहती भी है की देखो लगता है, तुम मेरे से ज्यादा ठण्ड से प्यार करते हो. वो तुम्हे अपनी सौतन समझती है .,, पर उस बेवकुफ़ को कौन समझाए ,कि "ठण्ड और प्यार का डेडली कॉम्बिनेशन" होता है. तुम बिलकुल श्रुति की तरह मुझे मेरे पढाई से दूर करती हो ,तुम्हारी ठण्ड और उसके केयर में मै आलसी हो जाता हु .
बैलेंस बनाना बहुत मुश्किल होता है .देखो तुम्हारी वजह से आज श्रुति को भी ब्लेम कर दिया, पर लाख शिकायतों के बाद भी तुम्हारा इन्तजार भी हर साल वेसे ही करता हु, जिस तरह हर सेकंड श्रुति से मुलाकात का . मेरे और श्रुति के प्यार में तुम कैटेलिस्ट टाइप काम करती हो, इसलिए थैंक्स तो बनता है .
बैलेंस बनाना बहुत मुश्किल होता है .देखो तुम्हारी वजह से आज श्रुति को भी ब्लेम कर दिया, पर लाख शिकायतों के बाद भी तुम्हारा इन्तजार भी हर साल वेसे ही करता हु, जिस तरह हर सेकंड श्रुति से मुलाकात का . मेरे और श्रुति के प्यार में तुम कैटेलिस्ट टाइप काम करती हो, इसलिए थैंक्स तो बनता है .
तुम्हारा गौरव

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