मुझे नही आता तरस, मेरी सम्वेदनाएँ नही फूटी जब खिंच कर गाड़ी से सड़कों पर लिटाया गया उसे। मैं पॉपकॉर्न खा रहा था और फेसबुक पोस्ट करने की सोच रहा था जब गौरक्षक के लात घूंसे उसके जबड़े तोड़ते रहे, हड्डियां मसलते रहे । यह सांस्कृतिक भीड़ अंतड़ियों को फाड़ कर गौभक्ति भर देना चाहती है। वो दिन रात टहलते है सड़कों पर, गाड़ियों से गाय की रक्षा में, हिन्दुओ की गाय की रक्षा में। जब कोई मुसलमान, दलित दीखता है गाय के आसपास वो बिना सवाल के उन्हें गाय हत्यारा घोषित करते है, इससे पहले की गाय की हत्या साबित हो, वो इंसान की हत्या कर देते है, और खुश करते है अपने मन को,
एक विराट शांति, ये चमकता ओज उनके चेहरे पर दौड़ता है। आज उनकी गौभक्ति का एक तमगा लग गया सीने पर, हाँ आज उन्होंने सच्ची गो भक्ति कर ली। स्वर्ग में एक सीट बुक हुआ।
एक विराट शांति, ये चमकता ओज उनके चेहरे पर दौड़ता है। आज उनकी गौभक्ति का एक तमगा लग गया सीने पर, हाँ आज उन्होंने सच्ची गो भक्ति कर ली। स्वर्ग में एक सीट बुक हुआ।
मैंने देखा भुजाओं में बल युवाओं के, ये रौद्र रूप कुछ कर गुजरने का, देश की संस्कृति बचाने का , सारे बौद्धिक विचारों पर तमाचा जड़ने का, हां मैंने देखा उनके कोमल जज्बातों को जब कोई छूता है, चाहे वो गाय के नाम पर, या भगवान के नाम पर तो वो लहु बहाने के लिये तैयार रहते है, अपना नही किसी और का। इसे सहिष्णुता से जबड़न न जोड़े। अहिंसक देश हिंसा कर सकता है, जब बात गाय की हो। आपलोग अपनी माँ को माँ मानिये , वो लोग गाय को माँ मानेंगे।
घर में अपनी माँ पर हो रहे अत्याचार पर कभी आवाज नही उठाये भले, पर वो गाय को जब मुसलमानों, दलितों के हाथ में देखकर ऐसे अपवित्तर काम से चुप नही रहेंगे। वो जान ले लेंगे। यह आजादी हमे शास्त्र देता है, संविधान का पता नही।
घर में अपनी माँ पर हो रहे अत्याचार पर कभी आवाज नही उठाये भले, पर वो गाय को जब मुसलमानों, दलितों के हाथ में देखकर ऐसे अपवित्तर काम से चुप नही रहेंगे। वो जान ले लेंगे। यह आजादी हमे शास्त्र देता है, संविधान का पता नही।
इस कौम को ऐसे ही युवाओं की तो जरूरत है, ये चौड़ी छाती, ये विराट ललाट, हाथ में डंडा , सिर पर साफा, नाम के आगे या पीछे गौरक्षक।

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