तुम्हारी यादें हरी घास सी है
जो मेरे मन के जमीन पर
बेमौसम उग आया करती है...
जो मेरे मन के जमीन पर
बेमौसम उग आया करती है...
तुम्हारी यादें गौरैये का झुंड है
जो हर ढलते शाम में
मेरे नींद के घोंसले में आ आ जाया करती है
जो हर ढलते शाम में
मेरे नींद के घोंसले में आ आ जाया करती है
तुम्हारी यादें सीधी जाती सड़क पर
उल्टी यात्राएँ है
जो बेवजह है , पर खूबसूरत है
उल्टी यात्राएँ है
जो बेवजह है , पर खूबसूरत है
तुम्हारी यादें एक घाटी है
जो दो पहाड़ो को जोड़ती है
जैसे मैं और तुम..
जो दो पहाड़ो को जोड़ती है
जैसे मैं और तुम..
तुम्हारी यादें
हिमाचल के पर्वतो पर उड़ते बादल है
जो बरस जाते है मेरी आँखों से अचानक
हिमाचल के पर्वतो पर उड़ते बादल है
जो बरस जाते है मेरी आँखों से अचानक
तुम्हारी यादें
सेमर की रुई है
जिसे मैं अपने खुले हथेलियों पर रख छोड़ता हूँ
बेपरवाह उड़ने को
सेमर की रुई है
जिसे मैं अपने खुले हथेलियों पर रख छोड़ता हूँ
बेपरवाह उड़ने को
तुम्हारी यादें गर्म चाय सी है
जो मेरे मन के प्याले में भरा रहता है हमेशा
जो मेरे मन के प्याले में भरा रहता है हमेशा
तुम्हारी यादें
धूप सी छलांग है
जो तय करती है पलक झपकते मीलो दूरियाँ
धूप सी छलांग है
जो तय करती है पलक झपकते मीलो दूरियाँ
तुम्हारी यादें
एक खूबसूरत सफर है
जिसे मंजिल तक पहुंचने की जल्दी नही..
एक खूबसूरत सफर है
जिसे मंजिल तक पहुंचने की जल्दी नही..

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